रूस के कामचटका प्रायद्वीप में शुक्रवार को 7 तीव्रता का भूकंप आया। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक यह दोपहर 3:30 बजे (भारतीय समय के मुताबिक 9 बजे) आया। भूकंप 152 किमी की गहराई में आया। फिलहाल वहां सुनामी का खतरा नहीं है। पिछले साल 30 जुलाई को रूस के कामचटका प्रायद्वीप के तट के पास 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। यह 2025 का सबसे शक्तिशाली भूकंप था। इसके बाद आई सुनामी ने तटीय इलाकों में तबाही मचाई और एक गांव का कुछ हिस्सा समुद्र में बह गया। कामचटका में बार-बार भूकंप क्यों आते है? कामचटका प्रशांत महासागर के उस इलाके में है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला ऐसा क्षेत्र है, जहां दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी फटते हैं। कामचटका में बार-बार भूकंप आने की मुख्य वजह जमीन के नीचे मौजूद विशाल प्लेटों की हलचल है। यहां प्रशांत प्लेट धीरे-धीरे ओखोत्स्क प्लेट के नीचे खिसक रही है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहते हैं। दोनों प्लेटों के बीच घर्षण से चट्टानों में दबाव जमा होता रहता है। जब यह दबाव अचानक बाहर निकलता है, तो भूकंप आता है। प्लेटों की इसी हलचल से जमीन के नीचे गर्म पिघला हुआ पदार्थ बनता है, जिसे मैग्मा कहते हैं। यह बाहर निकलता है तो ज्वालामुखी फटता है। यहां कई सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं। समुद्र के नीचे तेज भूकंप आने पर सुनामी का खतरा भी रहता है। इस इलाके में जमीन के नीचे प्लेटों की हलचल लगातार जारी रहती है। इसलिए यहां भविष्य में भी भूकंप आने की आशंका बनी रहेगी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
