इजराइल में 90% वोटों की गिनती हो चुकी है, लेकिन दोनों बड़े गठबंधन बहुमत के आंकड़े से दूर हैं। नेतन्याहू के विरोधी सरकार बनाने के लिए एकजुट तो हैं, लेकिन प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इस पर उनके बीच सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में अरब पार्टियां किंगमेकर की भूमिका निभा सकती हैं। उनके समर्थन से सरकार बनाने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन नेतन्याहू उन्हें सरकार में शामिल करने के खिलाफ हैं। वहीं, नेतन्याहू के विरोधी गादी आइजनकोट ने भी अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने से इनकार कर दिया है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अरब पार्टियां हमास को आतंकी संगठन मानने से इनकार करती हैं। नेतन्याहू हों या आइजनकोट सामने सरकार बनाने के तीन रास्ते हैं… 1. नेतन्याहू विरोधी पार्टियां मिलकर सरकार बनाएं चुनाव के बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग सभी पार्टियों के नेताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद वे उस नेता को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की सबसे ज्यादा संभावना होगी। गादी आइजनकोट के लिए सबसे आसान रास्ता नेतन्याहू विरोधी पार्टियों को एकजुट करना होगा। इनमें दक्षिणपंथी नेता एविगडोर लिबरमैन और वामपंथी नेता यायर गोलान की पार्टियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इन पार्टियों के बीच मतभेद दूर करना आसान नहीं होगा। 2021 में भी नेतन्याहू के विरोधियों ने मिलकर सरकार बनाई थी। तब दक्षिणपंथी नेता नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड बारी-बारी से प्रधानमंत्री बने थे। अरब पार्टी राअम के समर्थन से इस गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार किया था। हालांकि, पार्टियों के बीच मतभेदों के चलते यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। करीब एक साल बाद 2022 में कुछ सांसदों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद संसद भंग करनी पड़ी और नए चुनाव कराने का रास्ता खुला। इस बार भी आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए अरब नेता मंसूर अब्बास की पार्टी राअम का समर्थन लेना पड़ सकता है। लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करना और मुश्किल हो गया है। ऐसे में राअम का समर्थन जुटाना आइजनकोट के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है। 2. बहुमत के बिना सरकार चलाने की कोशिश दूसरा रास्ता अल्पमत सरकार बनाने का है। इसमें किसी गठबंधन के पास अपने दम पर 61 सीटें नहीं होतीं, लेकिन दूसरी पार्टियों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई और चलाई जा सकती है। समर्थन देने वाली पार्टियों का सरकार में शामिल होना जरूरी नहीं है। आइजनकोट या उनके किसी सहयोगी के लिए यह विकल्प हो सकता है। अरब पार्टियां सरकार में शामिल हुए बिना भी उन्हें समर्थन दे सकती हैं। इससे उन्हें सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में मदद मिल सकती है। आइजनकोट को नेतन्याहू की समर्थक पार्टियों के कुछ सांसदों का समर्थन जुटाने की भी जरूरत पड़ सकती है। लेकिन नेतन्याहू का अपनी सहयोगी पार्टियों पर मजबूत प्रभाव है। ऐसे में उनके सांसदों को नेतन्याहू का साथ छोड़कर आइजनकोट का समर्थन करने के लिए राजी करना बड़ी चुनौती होगी। 3. विपक्षी खेमे में सेंध लगाकर सरकार बनाना तीसरा रास्ता विपक्षी गठबंधन में सेंध लगाकर बहुमत जुटाना हो सकता है। नेतन्याहू इसके लिए वे विपक्ष के किसी नेता या सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। इस विकल्प में नफ्ताली बेनेट और एविगडोर लिबरमैन के नाम अहम हैं। दोनों दक्षिणपंथी नेता हैं, लेकिन नेतन्याहू के विरोधी खेमे में शामिल हैं। बेनेट पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं, जबकि लिबरमैन लंबे समय तक नेतन्याहू के सहयोगी रहे हैं। हालांकि, दोनों नेताओं ने नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने का विरोध किया है। 4. दोनों दल मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाएं चौथी संभावना यह है कि नेतन्याहू या आइजनकोट में से कोई भी 61 सीटों का बहुमत नहीं जुटा पाए। ऐसी स्थिति में दोनों खेमों के कुछ दल मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। ईरान के साथ दोबारा जंग जैसी कोई बड़ी आपात स्थिति पैदा होने पर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की जरूरत महसूस की जा सकती है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद भी गादी आइजनकोट समेत नेतन्याहू के कुछ विरोधी गाजा में युद्ध के लिए बनी सरकार की युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए थे। हालांकि, नेतन्याहू विरोधी पार्टियों के बीच भी मतभेद हैं। अरब नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले जॉइंट लिस्ट गठबंधन की विचारधारा दक्षिणपंथी पार्टी इजराइल बेतेनु से बिल्कुल अलग है। अगर कोई भी नेता सरकार बनाने में कामयाब नहीं होता, तो तय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। तब तक नई सरकार बनने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। 5. बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनाना चौथा रास्ता अल्पमत सरकार बनाने का है। इसमें किसी पार्टी या गठबंधन के पास अपने दम पर 61 सीटें नहीं होतीं, लेकिन दूसरी पार्टियों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई जा सकती है। समर्थन देने वाली पार्टियों का सरकार में शामिल होना जरूरी नहीं है। गादी आइजनकोट या उनके किसी सहयोगी के लिए यह विकल्प हो सकता है। इसके लिए उन्हें अरब पार्टियों का समर्थन लेना पड़ सकता है। ये पार्टियां सरकार में शामिल हुए बिना भी संसद में उनके गठबंधन का समर्थन कर सकती हैं। हालांकि, ऐसी सरकार चलाना आसान नहीं होगा। संसद में बजट पास कराने, कानून बनाने और बड़े फैसले लेने के लिए उसे दूसरी पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा। किसी अहम मुद्दे पर समर्थन नहीं मिलने से सरकार के सामने संकट खड़ा हो सकता है। ————————– यह खबर भी पढ़ें…. ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव हारने वाले बोल्सोनारो अमेरिका भागे: पत्नी और दो बेटियां भी साथ; सरकार ने पासपोर्ट रद्द किया ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो अमेरिका रवाना हो गए हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, फ्लावियो के एक सहयोगी ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की। सरकार ने उनका पासपोर्ट भी रद्द कर दिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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